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Monday, June 14, 2021
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वेब चर्चा: विशेषज्ञों ने तम्बाकू के सेवन को बताया विभिन्न बीमारियों का कारक

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के कम्युनिटी एवं फेमिली मेडिसिन विभाग की ओर से विश्व तम्बाकू निषेद्य दिवस के उपलक्ष्य में वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें एम्स ऋषिकेश, राज्य सरकार के विशेषज्ञों व विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। वेब चर्चा में विशेषज्ञों ने तम्बाकू के सेवन को विभिन्न बीमारियों का कारक बताया और लोगों से इसके सेवन से दूर रहने और दूसरे लोगों को भी इसके लिए जागरुक करने पर जोर दिया।

एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में मुख्यअतिथि संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने तम्बाकू के प्रकार व इसके इस्तेमाल से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जोर दिया कि तम्बाकू जैसे नशे को लेकर लोगों को धरातल पर जागरुक करने की आवश्यकता है साथ ही इस दिशा में कार्य कर रहे स्वास्थ्य संस्थानों व स्वयंसेवी संगठनों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सरकार की ओर से तम्बाकू निषेद्य के लिए किए जा रहे प्रयासों व कार्यक्रमों को आमजन तक पहुंचाया जाना महत्वपूर्ण है।

निदेशक एम्स ने बताया कि तम्बाकू के सेवन से आमजन को दूर रखने व इसके नफा नुकसान के प्रति जागरुक करने के साथ साथ इससे सरकार को होने वाली राजस्व हानि की भरपाई पर भी विमर्श जरुरी है और इसके लिए ठोस विकल्प तैयार होना चाहिए। डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने उत्तराखंड में तम्बाकू सेवन की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि तम्बाकू छोड़ने के लिए लिया गया संकल्प महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि किसी भी बुरी आदत को त्यागने के लिए व्यक्ति के मन में दृढ़ निश्चय का होना जरुरी है।

सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने कहा कि हमें इस अवसर पर तम्बाकू सेवन को कम करने की बजाए इसके उपयोग को खत्म करने की जरुरत बताई। उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि वर्तमान में कोविड-19 महामारी के समय में तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों को इसका उपयोग हमेशा के लिए बंद करने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कोविड जैसी महामारी के समय अकाल मृत्यु के शिकार होने वाले लोगों में इस तरह का नशा करने वाले लोगों की संख्या भी काफी अधिक होती है।

उन्होंने विभाग द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारियां साझा की। एनएचएम, उत्तराखंड की निदेशक डा. सरोज नैथानी ने राज्य स्वास्थ्य विभाग व सरकार द्वारा तम्बाकू की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तम्बाकू के साथ साथ गुटखा, खैनी व अन्य तरह के तम्बाकू उत्पादों का इस्तेमाल बंद करने से किस तरह से सांस संबंधी बीमारियों को कम किया जा सकता है।

दिल्ली की स्वयंसेवी संस्था द यूनियन के डिप्टी रिजनल डायरेक्टर डा. राना जे. सिंह तम्बाकू के इस्तेमाल को बंद करने की वजहों पर प्रकाश डाला, साथ ही बताया कि इसके इस्तेमाल से किस तरह से गैर संचारी रोगों में बढ़ोत्तरी हो रही है। सीएफएम विभाग के डा. संतोष कुमार ने युवाओं को बताया कि तम्बाकू के सेवन व उससे होने वाले दुष्प्रभावों से कैसे बचा जा सकता है। उन्होंने युवाओं में तम्बाकू इस्तेमाल की लत लगने के कारणों पर प्रकाश डाला।

वेबिनार में बालाजी सेवा संस्थान की स्टेट प्राेग्राम मैनेजर ममता थापा ने ऐसे जनजागरुकता विषयों में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका के बारे में जानकारी दी। सीएफएम विभाग के डा. योगेश बहुरूपी व डा. महेंद्र सिंह ने लोगों की चर्चा के दौरान उनके सवालों के जवाब दिए। जबकि एमपीएच स्टूडेंट्स ने तम्बाकू निवारण की को लेकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

इस अवसर पर संस्थान के तम्बाकू सेल के नोडल ऑफिसर व कार्यक्रम आयोजक डा. प्रदीप अग्रवाल के अलावा डा. ट्विंकल शर्मा, डा. नंदिता, डा. सौरभ कुमार,डा. दिशा अग्रवाल, डा. अमेटी दास, श्वैता, अर्षदीप सिंह, अंकुर आदि मौजूद थे।

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