देहरादून : संचार क्रांति और तकनीकि विकास ने पर्यावरण के लिए प्रदूषण का एक बड़ा कारक पैदा कर दिया है। जिसे ई वेस्ट कहा जाता है। सरकारी व गैर सरकारी दफ़तरों में इस तरह का कचरा तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसका निस्‍तारण और शोधन करने में लापरवाही बरती जा रही है।

ई वेस्ट में बिजली और इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों का अवशिष्‍ट शामिल होता है। खराब होने के बाद उपकरणों व उनके पुर्जे अनुपयोगी हो जाते हैं। पिछले एक दशक में सरकारी और गैरसरकारी दफ्तरों के साथ ही कई निजी प्रतिष्‍ठानों में ये कचरा बढ़ता चला जा रहा है। इस कचरे के खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने ई वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली 2016 लागू की है।

जिसके मुताबिक हर सरकारी व गैर सरकारी विभाग नियमित अंतराल पर बढ़ते इलेक्‍ट्रॉनिक कचरे का निस्‍तारण करेगा। लेकिन उत्‍तराखंड में सरकारी तंत्र के साथ ही गैर सरकारी संस्‍थान भी इस दिशा में पूरी तरह लापरवाह है। लिहाजा इन विभागों में ई वेस्ट लगातार बढ़ता जा रहा है।

अनमोल पर्यावरण संरक्षण संस्‍थान ने मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ध्‍यान इस ओर खींचा है। संस्‍था ने ई वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली के उल्‍लंघन का आरोप भी विभागों पर लगाया है। संस्‍था से जुड़े एसके वर्मा ने  बताया कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो बढ़ता ई वेस्‍ट पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा पैदा कर सकता है पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारिका सेमवाल के मुताबिक ई वेस्ट के प्रबंधन को लेकर अभी से गंभीरता बरतनी जरूरी है, क्‍यों कि इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और भविष्‍य में ये बड़ा संकट बन सकता है।

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