देहरादून। सड़क निर्माण के मामले में लापरवाही को लेकर लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के आदेश पर मंगलवार को आज सचिव लोनिवि आर0के0 सुधांशु ने निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं।

यह मामला बार्डर रोड़ से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में सामरिक महत्व की जौलजीबी-टनकपुर सड़क निर्माण का कार्य केन्द्र सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। विदित हो कि इस मार्ग के दूसरे चरण का कार्य अगस्त 2017 से बंद है।

चंपावत जनपद के अंतर्गत टनकपुर से रूपालीगाड़ तक इस सड़क का निर्माण कार्य 2019 में पूरा हो जाना था, लेकिन इस मार्ग निर्माण के कार्य में निविदाओं को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला कोर्ट में चलने के कारण सड़क का निर्माण अधर में लटका हुआ है।

सड़क निर्माण में लापरवाही का जब यह मामला मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पास पहुंचा तो योजना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। सीएम के आदेश पर आज सचिव ने दो अभियन्ताओं को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

निलंबित इंजीनियरों में एक पिथौरागढ़ के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर मयन पाल सिंह वर्मा हैं, जबकि दूसरे प्रभारी सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर मनोहर सिंह शामिल हैं। दोनों इंजीनियरों को प्रथम दृष्टया इस मोटर मार्ग की निविदा प्रक्रिया में देर करने का दोषी माना गया है।

भारतीय रक्षा बलों के आवागमन एवं भारतीय सीमा की रक्षा के लिए उपयोग में लाए जाने वाला टनकपुर जौलजीवी मोटर मार्ग भारत नेपाल सीमा पर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मार्ग निर्माण के लिए लगभग 110 करोड़ रुपये की धनराशि उत्तराखण्ड सरकार को जारी की है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदार को अधिकारियों ने इस मोटर मार्ग का ठेका फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दे दिया था।

निविदा की जांच के बाद उसे निरस्त किया गया था। उक्त निविदा निरस्त होने पर ठेकेदार दिलीप सिंह ने दोबारा निविदा निकालने पर न्यायालय से स्टे ले लिया था। विभाग ने स्टे को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस पर कोर्ट ने यह प्रकरण आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल को भेज दिया। ट्रिब्यूनल ने मामले में यथा स्थिति बनाने के आदेश जारी कर दिए।

यथा स्थिति हटने के बाद तत्कालीन एसई मयन पाल सिंह वर्मा ने 12 दिसंबर 2019 को निविदा जारी की। यह निविदा 24 दिसंबर 2019 तक विभाग के पोर्टल पर अपलोड की जानी थी, लेकिन एसई ने अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए यह निविदा स्थगित कर दी।

एसई के रूचि न लेने से 12 जनवरी 2020 तक निविदा प्रक्रिया बाधित रही। 13 जनवरी को प्रभारी एसई मनोहर सिंह ने शुद्धि पत्र जारी कर अंतिम तिथि 19 मार्च 2020 तय की। हार्ड कापी 26 मार्च तक जमा करानी थी, लेकिन 18 मार्च को ही प्रभारी एसई ने फिर शुद्धि पत्र जारी कर अपरिहार्य कारण बताकर अंतिम तिथि 26 मार्च कर दी।

इस बीच लॉकडाउन की वजह से निविदा की प्रक्रिया नहीं हो सकी और इस मार्ग का निर्माण लटक गया। निविदा प्रक्रिया में इस हीलाहवाली से जहां ठेकेदार को आर्बिट्रेशन से अवार्ड प्राप्त हुआ, वहीं मोटर मार्ग का निर्माण नहीं हो सका।

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