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Thursday, May 6, 2021
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AIIMS Rishikesh: कोविड महामारी के दौर में स्थानीय खेती को बढ़ावा देने पर दिया जोर

ऋषिकेश। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के तत्वावधान में स्वास्थ्य और बीमारी में स्थानीय खाद्य पदार्थों की भूमिका विषय पर आयोजित वेबीनार में उत्तराखंड की पोषण स्थिति के बारे में चर्चा की गई। इस दौरान खासकर कोविड महामारी के दौर में स्थानीय खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

कोरोना काल में स्थानीय खाद्य पदार्थों को अपनाने और स्थानीय खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एम्स के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग (सीएफएम) की ओर से आयोजित वेबीनार में विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि आम जनसमुदाय की पोषण की स्थिति सुधारने में मेडिकल काॅलेजों को अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। एम्स सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने कहा कि पोषक भोजन से ही पोषकता बनी रहती है। उन्होंने बताया कि पोषण की स्थिति तभी सुधरेगी, जब हम अपने भोजन में पोषक तत्वों से युक्त अनाजों को शामिल करेंगे।

उत्तराखंड राज्य विज्ञान परिषद के संयुक्त निदेशक डा. डीपी उनियाल ने उत्तराखंड को फलों का अग्रणीय उत्पादनकर्ता बताया और साथ ही फलों की पौष्टिकता का महत्व समझाया। उनका सुझाव है कि एम्स के विशेषज्ञों के साथ संयुक्तरूप से अनुसंधान के माध्यम द्वारा सामुदायिक पोषण की स्थिति मजबूत की जा सकती है।

राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण विभाग के प्रमुख डा. लक्ष्माईह ने ट्रिपल बर्डन के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि अतिपोषण, अल्पपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से मनुष्य में विभिन्न प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि यदि भोजन में पोषकता प्रचुर मात्रा में हो तो बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी बढ़ जाती है।इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड एरोमेटिक प्लांट्स, गैरसेण के निदेशक और काॅलेज ऑफ हाॅर्टिकल्चर भरसार के डीन प्रो. बीपी नौटियाल ने महत्वपूर्ण विचार साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों के औषधीय मूल्यों की जानकारी दी।

जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की खाद्य और पोषण विभाग की प्रमुख डा. सरिता श्रीवास्तव ने कहा कि स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा मिलना जरूरी है। पोषक पदार्थों में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। शरीर को निरोगी रखने के लिए इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वेबीनार को एम्स के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डा. रंजीता कुमारी, एसोसिएट प्रोफेसर डा. स्मिता सिन्हा आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सीएफएम विभाग के सभी फैकल्टी मेंबर्स, जूनियर रेजिडेंट्स डाक्टर व एमपीएच स्टूडेंट्स मौजूद थे।

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