उत्तराखण्ड में बर्ड फ्लू को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने प्रदेश सभी जिलों को गाइडलाइन जारी कर दी है। वहीं, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ब्लॉक स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम के माध्यम से पोल्ट्री फार्म पर निगरानी रखी जाए। निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी कोई मामला सामने आता है तो सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेजा जाए।

पशुपालन निदेशक डा0 के0के0 जोशी ने बताया कि प्रदेश में अभी तक बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर विभाग की ओर से सभी जिलों को गाइडलाइन जारी कर दी गई है। खासतौर पर पोल्ट्री फॉर्म को लेकर विशेष रूप से एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

इधर, बर्ड फ्लू का एक भी मामला सामने न आने से फिलहाल वन विभाग राहत में है। वन विभाग की ओर से आद्र भूमि या वैटलैंड की छानबीन का सिलसिला जारी रहा। वैसे वन विभाग के लिए यह काम आसान साबित नहीं हो रहा है। प्रदेश में 900 से अधिक वैटलैंड हैं और इनमें आसन बैराज, झिलमिल आदि प्रवासी पक्षियों के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं।

वन विभाग के मुताबिक आसन बैराज में ही 19 नस्ल के प्रवासी पक्षी हर साल पहुंचते हैं। इनकी संख्या कई बार छह हजार से अधिक हो जाती है। बताया जा रहा है कि बर्ड फ्लू संक्रमण की अधिक आशंका प्रवासी पक्षियों से ही अधिक है। यह समय इन पक्षियों के एक जगह से दूसरी जगह जाने का भी है।

हालांकि जिस हिसाब से सरकारी महकमों को इस मामले में सक्रिय होने का सवाल है तो अभी तक विभागों ने इस बीमारी के लक्षणों की पहचान आदि के बारे में कोई भी जानकारी आम जनमानस के लिए प्रचार माध्यमों के जरिए जारी नहीं की है जिससे यह प्रतीत होता है कि अभी विभाग इस पर कोई खास ध्यान नहीं दे रहे हैं।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि मंगलवार को वन विभाग पूरी तरह से सक्रिय रहा और एक भी मामला सामने नहीं आया। कोई मामला सामने आता है तो उसे आधे घंटे में रिपोर्ट करने को कहा गया है। बताया कि पड़ोसी राज्य हिमाचल में संक्रमण का मामले सामने आने की वजह से अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। वन विभाग पूरी तरह से सतर्क है और लगातार निगरानी की जा रही है।

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