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Tuesday, April 13, 2021
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चारधाम यात्रा 2021: श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित

केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई को मेष लग्न में सुबह पांच बजे खोले जाएंगे। इसके बाद छह माह तक देश-विदेश के श्रद्धालु धाम में ही आराध्य के दर्शन व पूजा-अर्चना कर सकेंगे। ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में आचार्यगणों द्वारा पंचांग गणना से केदारनाथ के कपाट खोलने का दिन व समय निर्धारित किया गया। 

गुरुवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर में सुबह 10 बजे आचार्य यशोधर मैठाणी, स्वयंबर सेमवाल, मृत्युंजय हीरेमठ व नवीन मैठाणी ने पंचांग गणना के आधार पर श्रीकेदारनाथ धाम के कपाट खोलने का दिन व समय लग्नानुसार निश्चित किया गया। इस मौके पर रावल भीमाशंकर लिंग ने कपाट खोलने की निर्धारित तिथि की घोषणा की।

बताया कि पंचांग गणना के अनुसार भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्याहरवें केदारनाथ के कपाट 17 मई को मेष लग्न में सुबह पांच बजे खोले जाएंगे। इससे पूर्व 13 मई को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान केदारनाथ के क्षेत्रपाल के रूप में पूजनीय आराध्य भैरवनाथ की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी।

जबकि 14 मई को विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से अपने धाम केदारनाथ के लिए प्रस्थान करेगी।

इस मौके पर देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, प्रशासनिक अधिकारी युद्धवीर सिंह पुष्पवाण, पुजारी शिवशंकर लिंग, वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, राजकुमार तिवारी, नगर पंचायत अध्यक्ष विजय राणा, पूर्व जिपं सदस्य संगीता नेगी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट समेत अन्य लोग मौजूद थे।

बाबा केदार की डोली का कार्यक्रम 

-14 मई को भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से अपने धाम के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव फाटा पहुंचेगी। 
-15 मई को बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा से रामपुर, सोनप्रयाग होते हुए भक्तों को दर्शन देकर गौरीकुंड में रात्रि विश्राम करेगी। 
-16 मई को बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली गौरीकुंड से प्रस्थान करते हुए जंगलचट्टी, भीमबली, रामबाड़ा, लिनचोली, रुद्रा प्वाइंट होते हुए 17 किमी का सफर तय कर अपने धाम केदारनाथ पहुंचेगी।

17 मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में बागेश लिंग धाम में छह माह तक आराध्य बाबा केदार की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालेंगे। देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्राकाल के लिए द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम में शिव लिंग, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में टी-गंगाधर लिंग और विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में शशिधर लिंग पूजा-अर्चना करेंगे। जबकि शिव शंकर लिंग को अतिरिक्त पुजारी के तौर पर रखा गया है। 

ज्योतिर्लिंग केदारनाथ पर इस बार पूर्णस्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा। रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि पूर्णस्वर्ण मुकुट को परंपरागत तरीके से बंगलूरू में बनाया गया है। यह मुकुट यात्राकाल में उत्सव मूर्ति के साथ केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर सुशोभित होगा। 

ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में भक्तों के लिए भंडारा का आयोजन किया गया है।  हंस फाउंडेशन के सहयोग से अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा, दिल्ली निवासी प्रेम रस्तोगी, अनिल गोयल, नरोत्तम गर्ग एवं श्याम सुंदर शर्मा द्वारा भक्तों के लिए दूध, फल व मिष्ठान को प्रसाद रूप में भंडारा आयोजित किया। 

रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 मई को ही खुलेंगे 

पंच केदारों में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट 17 मई को ब्रह्ममुहूर्त में भक्तों के लिए खुल जाएंगे। रुद्रनाथ मंदिर समिति की ओर से मंदिर के कपाट खोलने की तिथि निश्चित की। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष व रुद्रनाथ-गोपीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट ने बताया कि इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 मई को ब्रह्ममुहूर्त में खोले जाएंगे।

गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में 14 मई से रुद्रनाथ मंदिर के कपाट खोले जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। समुद्रतल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर में भोलेनाथ के मुख के दर्शन होते हैं। गोपेश्वर के सगर गांव से से लगभग 24 किमी की दूरी पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। मंदिर तक पहुंचने वाला आस्था पथ सुरभ्य बुग्यालों के बीच से होकर गुजरता है। 

पंच केदारों में सर्वश्रेष्ठ धाम केदारनाथ है। यहां भोलेनाथ के पश्चभाग के दर्शन होते हैं, जबकि द्वितीय केदार मद्महेश्वर में नाभि के, तृतीय केदार तुंगनाथ में भुजा, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में मुख और पंचम केदार कल्पेश्वर में शिव की जटाओं के दर्शन होते हैं।

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