अविकल थपलियाल 
इसमें कोई दोराय नहीं कि जारी कोरोना काल में भारतीय पुलिस ने बेहतरीन काम किया।भारी बोझ वहन करते हुए दिन रात  लग कर काम किया। नियमों का उल्लंघन कर भारी संख्या में मुकदमें भी दर्ज किये। जनता भी सहयोग करने में पीछे नही रही।
इस कड़ी में डयूटी से पुलिसकर्मी भी शारीरिक व मानसिक तौर पर खूब थके। पुलिसकर्मी लम्बे समय तक आगे भी कोरोना ड्यूटी कट सकें। इसके लिए सरकार को कोरोना संकट में उनकी  मानसिक शांति व शारीरिक फिटनेस के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए। अब इस कोरोनाकाल में जनता का एक बड़ा हिस्सा न तो सुबह वॉक कर पाया और न ही शाम को।
फिटनेस बहुत जरूरी है। चूंकि जिम बन्द है, योग केंद्र बन्द है। घर में कैद चल रही जनता को भी मानसिक और शारीरिक फिटनेस की बहुत सख्त आवश्यकता है। कोरोना की दहशत से दिनचर्या में आये अकल्पनीय बदलाव से आम शख्स एक अजीब से तनाव व अवसाद से गुजर रहा है। आत्महत्याएं भी हो रही है।
इधर, कोरोना अनलॉक के बाद जनता सुबह शाम सैर के लिए निकल रही है। लम्बे समय से वाक नही कर पाए युवा व बुजुर्ग वाक स्वंय को फिर से तरोताजा करने में जुटे हैं। हालांकि, शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक अभी भी घर से बाहर निकलना जुर्म की श्रेणी में है।
देहरादून पुलिस ने इस अवधि में सैर करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही है। अल्ल सुबह पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी लगाई गई है ताकि 7 बजे से पहले सड़कों पर सैर करने वालों को कसा जा सके। मेरा अनुरोध है कि जहां बहुत दिक्कत न हो वहां लॉकडाउन  सांय 8 बजे से सुबह 5 बजे तक ही किया जाना चाहिए। ताकि निराशा व अवसाद में चल रही आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुबह-शाम की सैर बिना किसी खौफ के कर सके। और थके मांदे पुलिसकर्मी भी थोड़ा चैन की नींद लेकर स्वंय को तरोताजा रख सके। नया नारा दिया है। इसे अभियान की तरह लेते हुए अपनी सहमति दीजिये।

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