फसल बीमा योजना के तहत नुकसान का आकलन करने के लिए सरकार मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्र के मानकों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। उत्तराखण्ड के पर्वतीय इलाकों में आपदा या अन्य कारणों से फसलों को होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार हर न्याय पंचायत स्तर पर मौसम केंद्र (वेदर सेंटर) स्थापित करेगी।

उल्लेखनीय है कि फसल बीमा योजना के तहत अभी तक उत्तराखण्ड में मैदानी क्षेत्रों में न्याय पंचायत और पहाड़ों में तहसील स्तर पर नुकसान का आकलन किया जाता है। अब सरकार इस मानक को बदलकर मैदानों में ग्राम पंचायत स्तर और पहाड़ों में न्याय पंचायत स्तर पर करने की तैयारी कर रही है।

बता दें कि प्रदेश में नुकसान का आकलन क्रॉप कटिंग पैटर्न के आधार पर किया जाता है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में मानव संसाधन की कमी के कारण क्रॉप कटिंग में कामयाबी न मिलने से सरकार ने मौसम केंद्र के माध्यम से नुकसान का आकलन करने की योजना बनाई है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में आउटसोर्स के माध्यम से क्रॉप कटिंग का डाटा कलेक्ट किया जाएगा।

सूबे के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आपदा या अन्य कारणों से राज्य में फसलों को काफी नुकसान होता है। फसल बीमा योजना में नुकसान के आकलन करने के लिए क्षेत्र के मानकों में बदलाव किया जाएगा। बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में न्याय पंचायत स्तर पर आकलन होगा। इसके लिए प्रदेश के हर न्याय पंचायत स्तर पर मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

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