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Tuesday, June 22, 2021
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शत्रु के हाॅट सीट पर आते ही नौकरशाही की बढ़ी बेचैनी

सूबे के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा पूर्व मुख्य सचिव शत्रुध्न सिंह को अपना मुख्य सलाहकार बनाने के बाद से प्रदेश के टाॅप नौकरशाही में खासी बेचैनी बढ़ गई है। आज बुद्धवार को ही शासन से मुख्य सलाहकार पद पर नियुक्ति के लिए आदेश हुए और आज ही शत्रुध्न सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कार्यभार भी ग्रहण कर लिया।

इससे पूर्व श्री सिंह द्वारा बीते मंगलवार को मुख्य सूचना आयुक्त के पद से राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उनके अचानक दिए गए इस्तीफे को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें सीएम तीरथ कैंप में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नये मुखिया के सामने जहां तमाम प्रकार की चुनौतियां आज भी खड़ी हैं, वहीं सरकारी कामकाज को लेकर सचिवालय की कार्य शैली एवं कार्य प्रणाली अल्प समय के चलते रिपांन्सिव जोन में आ खड़ी हो जाए, यह बड़ा सवाल था।

सूबे के किस नौकरशाह पर किस हद तक भरोसा जताया जाए, इसे समझने में ज्यादा समय की दरकार थी, लेकिन नये मुखिया के पास महज विकास कार्यों के लिए कुछ ही माह के अल्प समय होने के चलते एक अदद शासनिक एवं प्रशासनिक सलाहकार की प्रबल आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसकी भरपाई अब सीएम ने पूरी कर ली है।

मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बनने के बाद से सूबे की नौकरशाही में खासी बैचेनी बढ़ गई है। श्री सिंह जहां प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं, वहीं अनुभव के मामले में वह पीएमओ में भी काम कर चुके हैं। और इसमें भी कोई दोहराय नहीं कि उनकी गिनती ईमानदार, कर्मठ नाकरशाहों में की जाती है। प्रदेश में मौजूदा नौकरशाहों की बात की जाए तो उन्हें सभी अधिकारियों की कार्यप्रणाली व अनुभव का पूरा ज्ञान है। ऐसे में उनका यह अनुभव मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

तीरथ के हाथों प्रदेश का नेतृत्व ऐसे समय सौंपा गया, जब राज्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अभी जहां विधानसभा के दो उपचुनाव कराए जाने हैं जिसमें कि स्वयं एक सीट से मुख्यमंत्री को भी लड़ना है, वहीं गंगोत्री सीट पर भी उपचुनाव कराया जाना है।

अभी पिछले साल से राज्य में जारी कोरोना महामारी से ही नहीं निपटा जा सका है, वहीं आगामी फरवरी माह में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार के पास अब महज 5-7 माह का ही समय बचा है जिसमें उन्हें इन सभी चुनौतियों से होकर गुजरना है। अब देखना यह है कि सीएम अपनी इस अग्नि परीक्षा में किस प्रकार सफल हो पाते हैं।

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