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Wednesday, April 21, 2021
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India-China border: बीआरओ ने महज 5 दिन में तैयार किया भारत-चीन सीमा से जोड़ने वाला पुल

पिथौरागढ़। सीमा सड़क संगठन के इंजीनियरों ने रात दिन एक कर मुनस्यारी-मिलम सड़क मार्ग पर मात्र पांच दिन के भीतर भारत को चीन सीमा से जोड़ने वाला नया पुल का निर्माण कर दिया। विदित हो कि मुनस्यारी-मिलम मार्ग पर सैनर गाड़ नदी पर बना पुल बीती 22 जून को पोकलैंड ले जा रहे एक लोडेड ट्राला के पास होते समय टूट गया था, जिसके बाद भारत का चीन सीमा से संपर्क कट गया था।

इस पुल के बनने के जहां चीन सीमा तक सेना को अब पूरी मदद मिलेगी, वहीं मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को भी आवाजाही में इससे मदद मिल सकेगी। इस पुल निर्माण के बाद आज शनिवार को बीआरओ के द्वारा अपने ट्रक, ड्रोजर एवं पोकलैंड को इस पुल पर चलाकर ट्रायल लिया गया, जिसमें पुल सही बना पाया गया।

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सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों के मुताबिक यह पुल सही ढंग से बनकर तैयार हो गया है। शीघ्र ही इस पुल पर वाहनों की आवाजाही प्रारंभ कर दी जाएगी। बता दें कि इस पुल की महत्ता की गंभीरता को देखते हुए बीआरओ ने बीती 23 जून से नया पुल बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया था। इस पुल के बनने से अब चीन सीमा के लिए आवागमन और भी आसान हो जाएगा।

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सेना, आईटीबीपी को इसी रास्ते से पहुंचाई जाती है खाद्य एवं रसद

सामरिक महत्व के हिसाब से सेनर गाड़ पर बना यह पुल खासा महत्वपूर्ण है। यह पुल जहां चीन सीमा पर बनी पोस्टों के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं इस पुल से सीमांत के करीब दो दर्जन माइग्रेशन गांवों के लोगों की भी आवाजाही होती है। सेना एवं आईटीबीपी को इसी रास्ते से चीन सीमा पर बनी पोस्टों पर सभी प्रकार की जरूरी रसद और खाद्य सामग्री पहुंचाई जाती है। बीती 22 जून को पुल टूटने से सेना को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था और सीमांत के ग्रामीण भी इससे खासे कठिनाईयों में थे।

सीमांत के माइग्रेशन गांवों की भी बढ़ गई थी मुश्किलें

इस पुल के टूटने से सीमांत के माइग्रेशन गांव लास्पा, रिलकोट, बुर्फू, पांछू, गनघर, मिलम, बिल्जू, रालम, खिलांच, बौगडियार और तूला सहित कई अन्य गांवों के ग्रामीणों का संपर्क भी जिला मुख्यालय से कट गया था। पहले तक बरसात से पूर्व सीमांत के ग्रामीण जरूरी आवश्यकता वाली सामग्री को अपने गांवों तक पहुंचा देते थे, लेकिन इस बार सड़क और पुल बनने के बाद लोग आसानी से जरूरी सामग्री को गांवों तक पहुंचा रहे थे। इस पुल के टूटने के बाद ग्रामीणों को झटका लगा, लेकिन बीआरओ ने फिर से यह पुल बनाकर उनकी मुश्किल को भी आसान बना दिया है।

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