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Monday, April 12, 2021
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बसंतोत्सवः फूलों का दीदार करना है तो चले आइए 13 एवं 14 मार्च को राजभवन

इस वर्ष आगामी 13 से 14 मार्च तक राजभवन में आयोजित होने वाले बसंतोत्सव में हर ओर फूलों की महक रहेगी। स्कूली बच्चों के साथ ही आम लोगों के लिए पुष्प प्रदर्शनी में निःशुल्क प्रवेश रहेगा। हालांकि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नियमों का पालन करना होगा। प्रदर्शनी में आने के लिए मास्क पहनना, सैनिटाइज और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा। बसंतोत्सव में बच्चों की सहभागिता के लिए 12 मार्च को दिव्यांग और गरीब बच्चों को आमंत्रित किया गया है। यानी इस बार पुष्प प्रदर्शनी के प्रथम दर्शक बच्चे होंगे।

गुरूवार को आज राजभवन में आयोजित प्रेसवार्ता में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि राजभवन में 2003 से बसंतोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण बसंतोत्सव नहीं हो पाया था। इस बार कोविड के नियमों का पालन करते हुए 13 से 14 मार्च तक बसंतोत्सव मनाया जाएगा। अब बसंतोत्सव सांस्कृतिक व आर्थिक महोत्सव के रूप में पहचान बना चुका है। खुशी की अभिव्यक्ति करने के साथ ही पुष्प उत्पादन रोजगार व स्वरोजगार का माध्यम बन गया है।

फूलों के साथ जड़ी-बूटी, जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। जैविक उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए बाजार उपलब्ध करना होगा। इस बार शहरी क्षेत्रों में औद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए वर्टिकल गार्डन की जानकारी दी जाएगी। वहीं, खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले फूलों और उनके फायदे के बारे में लोगों की जानकारी दी जाएगी। इस मौके पर सचिव राज्यपाल बृजेश संत, सचिव कृषि एवं उद्यान हरबंस चुघ, अपर सचिव जितेंद्र सोनकर, निदेशक उद्यान एचएस बवेजा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

राज्यपाल ने कहा कि पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ 13 मार्च को किया जाएगा। काश्तकारों को पुष्प उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रदर्शनी में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। इसमें कट फ्लावर, पाटेड प्लांट्स प्रबंधन, लूज फ्लावर प्रबंधन, पुष्प के अतिरिक्त पाटेड प्लांटस, कैक्टस एवं सकुलेंटस, हैंगिंग पॉट्स, आन द स्पॉट फोटोग्राफी, फूलों की रंगोली, खाने योग्य फूलों की 12 से 18 आयु वर्ग के स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड के फलों को पहचान दिलाने के लिए इसी साल अगस्त-सितंबर में राजभवन में फलों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग के अधिकारियों को तैयारी करने को कहा गया है। हर्षिल का सेब काफी प्रसिद्ध है। उत्तराखंड का सेब विदेशों तक पहुंचने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

बसंतोत्सव के पहले दिन 13 मार्च को शाम छह से सात बजे सांस्कृतिक संध्या होगी। इसमें उत्तराखंड के प्राचीन हरियाली गीत, भजनों की प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन 14 मार्च को वृंदावन की फूलों की होली, मयूर नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेेग। इसके अलावा सेना, आईटीबीपी, पीएससी बैंड की भी मुख्य आकर्षक रहेगा।

13 मार्च को बसंतोत्सव का शुभारंभ होने के बाद आम लोग को पुष्प प्रदर्शनी में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। 14 मार्च को सुबह साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक पुष्प प्रदर्शनी आम लोगों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में गुलाब, गुडहल, बुरांस, स्ट्रॉबेरी, कैलेंडुला, ब्लॉसम आदि फूलों से तैयार खाद्य सामग्री व एक जनपद एक उत्पाद को प्रदर्शित किया जाएगा। गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा, जरबेरा, कारनेशन, ग्लेडियोलस, लीलियम, गुलदाउदी, आर्किड समेत अन्य कई प्रकार के फूल प्रदर्शनी में देखने को मिलेंगे। प्रदेश में वर्तमान में 250 करोड़ के फूलों का कारोबार किया जाता है।

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