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Tuesday, April 13, 2021
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हरिद्वार कुंभ: अवस्थापना कार्यों में हो रही देरी से नाराज बैरागी संतों ने अपर मेलाधिकारी से की मारपीट

हरिद्वार कुंभ के अवस्थापना कार्यों में हो रही देरी से नाराज बैरागी संतों ने गुरुवार शाम पंच निर्मोही अणि अखाड़े में अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह पर हमला बोल दिया। इस दौरान हरबीर सिंह घायल हो गए। सूचना मिलने पर आईजी कुंभ, एसपी कुंभ और सीओ फोर्स के साथ घटनास्थल पंच निर्मोही अणि अखाड़ा पहुंचे। जानकारी के अनुसार एक सिपाही भी इस दौरान घायल हुआ है।

बता दें कि कनखल थाना क्षेत्र के बैरागी कैंप में अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह की अखिल भारतीय निर्मोही अणी अखाड़ा में संतों के साथ बैठक होनी थी। हरबीर सिंह रात करीब आठ बजे कैंप पहुंचे। वहां पहले से ही अखाड़ा के कई संत मौजूद थे। कैंप में बिजली नहीं होने से बैरागियों का पारा चढ़ गया। बैरागियों ने उनके साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए हरबीर सिंह की घेराबंदी कर दी। वहीं, उनके साथ मारपीट भी की।

इसके बाद आईजी कुंभ संजय गुंज्याल, एसएसपी कुंभ जनमेज्य खंडूरी, एसएसपी हरिद्वार सेंथिल अवूदई कृष्णराज एस समेत जिला एवं मेला के अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। आईजी ने छावनी पहुंचकर संतों से बातचीत की और हरबीर सिंह को वहां से बाहर निकाला। उनकी आंख और शरीर में कई जगहों पर चोट लगी हैं। मारपीट करने वाले संतों को चिह्नित किया जा रहा है।

12 अप्रैल को बैरागी संतों का पहला शाही स्नान

बता दें कि महाकुंभ-2021 आज से विधिवत शुरू हो गया है, लेकिन संतों का कहना है कि मेला प्रशासन के दावों के बावजूद बैरागी कैंप क्षेत्र में संतों के लिए अभी तक अवस्थापना सुविधाएं मुहैया नहीं पाई हैं। अब जाकर कहीं बिजली के खंभों में तार खींचे जा रहे हैं तो कहीं धूल-मिट्टी से बचाव के लिए सड़कों पर रोड़ी-गिट्टी बिछाई जा रही है। शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संत जूझ रहे हैं। कछुआ चाल से अवस्थापना निर्माण कार्य होने से संतों में नाराजगी है।

बैरागियों के तीन अखाड़ों से हजारों की संख्या में साधु-संत जुड़े हैं। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की पहल पर 17 मार्च को मेला प्रशासन की ओर से अखाड़ों के लिए बैरागी कैंप क्षेत्र में भूमि आवंटित की गई। इससे पहले केंद्र सरकार की कोविड मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) छावनियों के लिए भूमि आवंटन में आड़े आ रही थी।

भूमि आवंटन नहीं होने से संन्यासी अखाड़ों ने अपने संतों के लिए अखाड़ा परिसर एवं दूसरी जगहों पर छावनियां लगवा दीं। बैरागी संतों का पहला शाही स्नान 12 अप्रैल को है। भूमि आवंटन के बाद अधिकतर छावनियां तैयार हो गई हैं। हजारों की संख्या में बैरागी संत भी छावनियों में पहुंच गए हैं। अप्रैल पहले सप्ताह तक बाकी बैरागी संत भी छावनियों में प्रवेश कर जाएंगे। पहले सप्ताह में ही पेशवाई और धर्म ध्वजाएं भी स्थापित होंगी।

मेला प्रशासन की ओर से अभी तक नए छावनी क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं। कई छावनियों के लिए आवंटित भूमि का अभी तक समतलीकरण नहीं हो सका है। क्षेत्र में धूल-मिट्टी उड़ रही है। पानी छिड़काव की व्यवस्था नहीं है। धूल-मिट्टी से बचाव के लिए सड़कों पर रोड़ी और गिट्टी बिछाई जा रही है।

बिजली के खंभे पहले ही खड़े कर दिए थे। कुछ जगहों पर तारें खींचकर लाइन जोड़ दी गई है, लेकिन कई इलाकों में अब जाकर तार खींचकर पानी की लाइन बिछाई जा रही है। गंगा तट के नजदीक छावनियों के पास शौचालय तक नहीं लगाए गए हैं। संतों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है।

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