बदरीनाथ। बेहद सादगी के साथ आज सुबह ब्रहम मुहूर्त में 4.30 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हिन्दुओं की प्रमुख आस्था के केन्द्र भगवान बदरीनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। इस दौरान शारीरिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया गया। इससे पूर्व बीती 14 मई को मंदिर एवं आसपास के परिसर को सैनीटाइज किया गया था।
इस मौके पर बदरीनाथ मंदिर के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चन्द्र उनियाल, राजगुरु, हकहकूकधारियों समेत सिर्फ 28 लोग ही इस बार कपाट खुलने के साक्षी बन सके। बदरी विशाल के कपाट खोलने की प्रक्रिया बीती 14 मई से ही प्रारंभ कर दी गई थी।

पहली बार धाम में कपाट खुलने पर नहीं रहा कोई श्रद्धालु

बदरी विशाल धाम के इतिहास में संभवतया यह पहला अवसर होगा, जब इस वर्ष धाम में कपाट खुलने के अवसर पर एक भी श्रद्धालु उपस्थित नहीं रहा। जिला प्रशासन द्वारा मंदिर के मुख्य पुजारी रावल, धर्माधिकारी, राजगुरू एवं हक-हकूकधारियों समेत सिर्फ 28 लोगों की सूचि पूर्व में जारी कर दी गई थी। पहली बार ऐसा हुआ कि पांडुकेश्वर से भी लोग धाम नहीं पहुंच सकें।

पहली बार बदली गई कपाट खोलने की तिथि

इव वर्ष भगवान बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि में भी परिवर्तन किया गया। नरेन्द्रनगर राजमहल द्वारा बसंत पंचमी के पर्व पर बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि पहले 30 अप्रैल निर्धारित की गई थी। बाद में कोरोना महामारी को देखते हुए आज की तिथि घोषित की गई। कपाट खुलने की तिथि में भी परिवर्तन संभवतया पहली बार ही हुआ है।

जानें भारतीय सेना का बदरीनाथ जी से क्या है संबंध

भारतीय सेना गढ़वाल राइफल्स और बदरीनाथ धाम का आपस में अनोखा संबंध है। शायद कम लोगों को ही यह जानकारी होगी कि भू-बैकुंठ धाम भगवान श्री बदरीनाथ जी भारतीय सेना गढ़वाल राइफल्स के ईष्ट देव हैं। यही वजह है कि जब भी भगवान बदरीविशाल मंदिर के कपाट खुलते व बन्द होते हैं, तो उस दिन सेना का बैंड ग्रुप मंदिर के मुख्य द्वार के पास विशेष भजन धुन बजाता है। इतना ही नहीं, कपाट खुलने और बन्द होने पर मंदिर के मुख्य पुजारी यानि रावल को सेना अथवा बीआरओ पूरे सम्मान प्रोटोकॉल के साथ अपने विशेष वाहन से बदरीनाथ धाम तक पहुंचाती और वापस भी लाती है। इसी परम्परा को निभाते हुए बीआरओ ने बीते रोज रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी को पूरे सम्मान के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचाया।

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चमोली। हिन्दुओं के प्रमुख आस्था के केन्द्र भू-बैकुंठ धाम श्री बदरीनाथ जी के कपाट कल 15 मई को सुबह ब्रहमकाल में 4.30 बजे ग्रीष्मकालीन पूजा एवं दर्शनार्थ के लिए खोल दिए जाएंगे। आज बदरी विशाल के मंदिर को फूलों से भव्य ढंग से सजाया गया।

पिछले वर्षों जहां कपाट खुलने पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने धाम पहुंचते थे वहीं इस बार कोरोना महामारी के चलते भगवान बदरी विशाल मंदिर के रावल के साथ धाम से जुड़े 28 लोग ही कपाट खुलने के अवसर पर मौजूद रहकर अखंड ज्योति के दर्शन करने के साक्षी बनेंगे।

मंदिर समिति प्रशासन द्वारा पूरे मंदिर परिसर एवं आसपास के सभी स्थलों को सैनीटाइज किया गया। इससे पूर्व आज पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर से उद्धव जी, कुबेर जी गरुड़ जी, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी एवं गाडू घड़ा तेल कलश के साथ बदरी विशाल के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी यहां धाम पहुंचे।

मीडिया प्रभारी देवस्थानम बोर्ड डा. हरीश गौड़ ने बताया कि मंदिर समिति द्वारा बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। मंदिर के रावल धाम में आज पहुंच गए हैं। कल 15 मई को सुबह 4.30 बजे विधि-विधान के साथ भगवान बदरी विशाल के कपाट खोले जाएंगे। बताया कि मंदिर परिसर एवं आसपास के सभी स्थलों को सैनीटाइज किया गया है। बताया कि इस बार बदरी विशाल के मंदिर को पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से सजाया गया है।


गोपेश्वर। भू-बैकुंठ धाम श्री बदरीनाथ मंदिर के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी आज जोशीमठ पहुंच गए। विदित हो कि ग्रीष्मकाल के लिए आगामी 15 मई को सुबह साढ़े चार बजे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया 13 मई से प्रारंभ हो जाएगी। परंपरा के तहत इसी दिवस को जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर से रावल (मुख्य पुजारी)आदि गुरु शंकराचार्य एवं गरुड़ भगवान की डोली का योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर आगमन होगा।

इसके अगले दिन 14 मई को पांडुकेश्वर से उद्घव जी व कुबेर जी की उत्सव डोली के साथ वह श्री बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे। इसके बाद विधि-विधान के साथ 15 मई को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

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