ऋषिकेश। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में कोरोना से संक्रमित होने वाले रोगियों का रिकवरी रेट अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया है। संस्थान के कोविड वार्ड में अब कोरोना के महज 20 एक्टिव केस ही रह गए हैं। खास बात यह भी है कि इनमें से कोई भी मरीज वेंटिलेटर पर नहीं है।

सरकार द्वारा कोविड-19 के संक्रमण से जारी गाइडलाइन का पालन कर बचाव और सावधानी बरतने के साथ-साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में समुचित उपचार का ही परिणाम है कि देशभर में कोरोना संक्रमित रोगियों के ठीक होने की दर में लगातार इजाफा हो रहा है। इसका असर एम्स ऋषिकेश में भी देखने को मिल रहा है। एम्स में भर्ती कोविड संक्रमित रोगियों के रिकवरी रेट में भी खासी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

संस्थान में कोविड के नोडल अधिकारी डा. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स में उपचार के लिए अति गंभीर स्थिति वाले मरीजों को ही भर्ती करने की सुविधा है। ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों से अब तक इलाज के लिए एम्स में भर्ती हुए कोरोना संक्रमित कुल 163 रोगियों में से 133 की रिकवरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यहां उपचार के बाद स्वस्थ होने वाले रोगियों में उत्तराखंड मूल के 107 जबकि उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश आदि प्रांतों के 29 रोगी शामिल हैं।

गौरतलब है कि एम्स में लिए जाने वाले अथवा दूसरे स्थानों से जांच के लिए संस्थान में आने वाले कोरोना सेंपल की जांच के लिए एम्स में बीते माह जून के दूसरे सप्ताह में एक नई एक्सट्रेक्शन मशीन स्थापित की गई थी। सेंपल परीक्षण के लिए इस नई मशीन के उपलब्ध होने के बाद से एम्स संस्थान में कोरोना सेंपल की जांच की दर भी दोगुनी हो रही है। लिहाजा कोरोना सेंपल जांच रिपोर्ट के लिए अब संक्रमित मरीजों व उनके तीमारदारों को अनावश्यक रूप से लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। जिससे समय पर मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाता है।

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