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Wednesday, April 21, 2021
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Homeहमारा उत्तराखण्डhimalaya: आस्था, रहस्य और रोमांच से भरी अलग दुनिया है हिमालय

himalaya: आस्था, रहस्य और रोमांच से भरी अलग दुनिया है हिमालय

पुष्कर रावत

हिमालय, एक विराट पर्वतमाला जिसे भारत का मुकुट, देवताओं का वास और न जाने कितने नामों से पुकारा जाता है, यह महज एक पर्वत नहीं बल्कि आस्‍था, रहस्‍य और रोमांच से भरी अलग दुनिया है। जहां सदियों से अटल और अडिग खड़े पहाड़ कभी इंसानी जीवट को चुनौती देते हैं, तो कभी उसे उंचाईयों को छूने को प्रेरित करते हैं। हिमालयी राज्‍य होने के कारण जाहिर है कि उत्‍तराखंड भी इन सभी विशेषताओं से परिपूर्ण है।

यहां कदम दर कदम कुदरती खूबसूरती, पूज्‍य तीर्थ और रोमांच से भरी वादियां देश दुनिया के लोगों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करती रही हैं। यही वजह है कि उत्‍तराखंड सरकार ने नेहरू पर्वतारोहण संस्‍थान उत्‍तरकाशी के साथ मिलकर उत्‍तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने को एक बड़ा कदम उठाया।

जिसके तहत सरकार के पर्यटन विकास परिषद और एनआईएम के आठ सदस्‍यीय संयुक्‍त अभियान दल ने गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में अब तक अविजित और अनाम चार चोटियों को फतह किया। दल ने इस अभियान को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. अ‍टल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया। प्रयास किया जा रहा है कि इन चारों हिमशिखरों को अटल पर्वत श्रंखला का नाम दिया जाए।

इस अभियान की शुरुआत 4 अक्‍टूबर 2018 को देहरादून से हुई। जहां प्रदेश के मुख्‍यमंत्री माननीय त्रिवेंद्र सिंह रावत और पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने दल को फलैग ऑफ कर रवाना किया। एनआईएम के प्रधानाचार्य, जाने माने पर्वतारोही व सेना मेडल कर्नल अमित बिष्‍ट और पर्यटन विकास परिषद के सदस्‍य अवधेश भट्ट के नेतृत्‍व में 5 अक्‍टूबर को गंगोत्री धाम में पूजा अर्चना कर दल गोमुख ट्रैक पर आगे बढ़ा। जिसके अन्‍य सदस्‍यों में ऑनरेरी कैप्‍टेन विजेंद्र सिंह, राकेश राणा, विश्‍वेश्‍वर सेमवाल, अनामिका बिष्‍ट, ज्‍योत्‍सना रावत व नायक घनश्‍याम शामिल थे।

गोमुख ट्रैक पर 6 अक्‍टूबर को दल ने भोजवासा में अपना बेस कैंप स्‍थापित किया। इसके बाद गोमुख ग्‍लेशियर को पार करते हुए दल रहस्‍यमय रक्‍तवन ग्‍लेशियर क्षेत्र में पहुंचा। ये पूरा इलाका पर्वतारोहण के शौकीनों के सामने कठिन चुनौतियां पेश करता है। यही वजह है कि इसके आस पास के अनेक हिमशिखर अब भी अछूते ही हैं। ऐसी ही कठिन चुनौतियों से निपटते हुए दल ने 9 अक्‍टूबर को समुद्रतल से 4460 मीटर की उंचाई पर कैंप 1 और 11 अक्‍टूबर को 5100 मीटर पर कैंप-2 लगाया गया।

अक्‍टूबर का महीना होने के कारण उच्‍च हिमालयी क्षेत्र में किसी भी वक्‍त भारी बर्फबारी की आशंका बनी हुई थी, लगातार गिरता तापमान और बदलता मौसम इस दल की परीक्षा ले रहा था। इसके बावजूद दल के सभी सदस्‍य आगे की कार्ययोजना पर काम करते रहे। 13 अक्‍टूबर को दल ने समिट कैंप से 6126 मीटर पर पहले और 14 अक्‍टूबर को 6080 मीटर उंचाई पर दूसरे शिखर पर सफल आरोहण कर दिया।

पहली दो चोटियों को फतह करने के बाद दल समिट कैंप वापस लौटा। जहां परिस्थितियों को देखते हुए अन्‍य दो चोटियों पर आरोहण के लिए पहले से तय रूट में परिवर्तन किया। 16 अक्‍टूबर को दल ने एक साथ 6566 मीटर ऊंचे और 6557 मीटर ऊंचे शिखर पर भी सफल आरोहण किया। इस संयुक्‍त अभियान की खास बात ये थी कि इसे 8 सदस्‍यों के छोटे से दल ने महज 12 दिनों में अंजाम दिया। अपने आप में ये अभियान इतना चुनौतीपूर्ण था कि इससे पहले कोई भारतीय या विदेशी दल रक्‍तवन ग्‍लेशियर क्षेत्र की इन चोटियों तक नहीं पहुंच सका था।

बताया जाता है कि वर्ष 1981 में एक इंडो फ्रेंच अभियान दल ने यह कोशिश की थी, लेकिन उसे आधे रास्‍ते से ही वापस लौटना पड़ा। पर्यटन विकास परिषद और एनआईएम के दल ने एक साथ चार अविजित और अनाम चोटियों पर आरोहण की उपलब्धि को अपने नाम कर लिया है। इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन ने इस अभियान को स्‍वीकार कर लिया है। साथ ही अब एनआईएम की ओर से इस उपलब्धि को लिम्‍का बुक ऑफ रिकॉर्डस में शामिल करने की प्रक्रिया की जा रही है। इस अभियान के जरिए राज्‍य सरकार ने उत्‍तराखंड में साहसिक पर्यटन के लिए नई राह खोली है, तो वहीं एनआईम ने अपने ध्‍येय वाक्‍य success lies in courage एक बार फिर साबित किया है।

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